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वन्यजीवों के विलुप्त होने के कारण

 वर्तमान में मानव के द्वारा ऐसे कारण उत्पन्न कर दिए गए हैं जिससे वन्य जीवों का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है मानव के अतिरिक्त कुछ प्राकृतिक कारण भी है जिससे वन्यजीव संकटग्रस्त है प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने के कारण है उनमें प्रमुख कारण निम्नलिखित प्रकार से है पहला जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि होने के फलस्वरूप मानव की आवश्यकता है बढ़ती है मानव ने आवाज कृषि उद्योग हेतु वन भूमि का उपयोग किया जिससे जीवन के प्राकृतिक आवास पर संकट उत्पन्न हो गया दूसरा बहुत बड़ी जल परियोजना जैसे भाखड़ा नांगल बांध परियोजना इत्यादि से वन भूमि पानी में डूबती गई जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने लगे तीसरा जंगलों में खनन कार्य पर्यावरण प्रदूषण से उत्पन्न अमली वर्षा आदि से भी प्राकृतिक आवास नष्ट हुए चौथा समुद्रों में तेल टैंकरों से तेल का रिसाव समुद्री जीव के आवास को नष्ट कर रहा है पांचवा ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण प्रति के आसपास वातावरण गर्म होता जा रहा है जिससे जय विविधता नष्ट हो रही है वन्यजीवों का अवैध शिकार प्रदूषण मानवता वन्यजीवों का संगत वन्य जीवो जीव...

शक्ति बौद्ध की आवश्यकता

हमारे देश को दो बातों की सबसे पहले और सबसे ज्यादा जरूरत है एक शक्ति बौद्ध और दूसरा सौंदर्य बोध शक्ति बोध का अर्थ है देश की शक्ति और सामर्थ्य का ज्ञान दूसरे देशों की तुलना में अपने देश को ही नहीं मानना चाहिए इससे देश के शक्ति बोध का आगाज पहुंचता है सौंदर्य बोध का अर्थ है किसी भी रूप में कुल कुरूचि की भावना को पनपने ने देना इधर-उधर कूड़ा फेंकने गंदी शब्दों का प्रयोग इधर की उधर लगाना समय देकर ने मिलना आदि से देश के सौंदर्य बोध को आघात पहुंचता है देश के सचिवों को जगाने के लिए हमें चाहिए कि हम सदा दूसरे देशों की अपेक्षा अपने देश की श्रेष्ठ समझे ऐसे करने से देश के शक्ति बोध का आगाज पहुंचता है उधर इस तथ्य की पुष्टि करता है यह महाबली कर्ण का सारथी था जब भी करण अर्जुन की अजय तक का एक हल्का सा उल्लेख कर देता बार-बार लेकर आत्मविश्वास में डाल दी जो उसके भाई की नींव रखने में सफल हो गए

संस्कृति और राष्ट्रीयता

प्राचीन काल में जब धर्म मजहब समस्त जीवन को प्रभावित करता है था तब संस्कृति के बनाने में उसका भी हाथ था किंतु धर्म के अतिरिक्त अन्य कारण भी सांस्कृतिक कारण में सहायक होते हैं थे आज मजहब का प्रभाव बहुत कम हो गया है अन्य विचार जिस राष्ट्रीयता आंधी उसका स्थान ले रहे हैं राष्ट्रीयता की भावना तो मजहब से ऊपर है हमारे देश में दुर्भाग्य से लोक संस्कृति को धर्म से अलग नहीं करते हैं इसका कारण अज्ञान और हमारे संग रहता है हम पर्याप्त मात्रा में जागरूक नहीं है हमको नहीं मालूम है कि कौन-कौन सी शक्तियां काम कर रही है और इसका विवेचन भी ठीक से नहीं कर पाते हैं कौन सा मार्ग सही है वही देश है जो युग धर्म की अपेक्षा करते हैं और परिवर्तन के लिए तैयार नहीं है परंतु हम आज भी अपनी आंखें नहीं खोल पा रहे हैं परिवर्तन का यह अर्थ कदापि नहीं है अतीत की सर्वथा उपेक्षा की जाइए ऐसा हो नहीं सकता अतीत के व्यस्त जीवन है उनकी तो रक्षा करनी ही है। किंतु नए मूल्यों का हमको स्वागत करना होगा तथा वे आचार विचार जो युग के लिए अनुपयुक्त और हानिकारक है उनका परित्याग भी करना होगा

जीने की कला

जीना भी एक कला है लेकिन कला नहीं तपस्या है जियो तो  प्राण डाल दो जिंदगी में डाल दो जीवन रस के उपकरणों में ठीक है लेकिन क्यों क्या जीवन के लिए जीना ही बड़ी बात है सारे संसार अपने मतलब के लिए ही तो जी रहा है याग वल्लव के बहुत बड़े ब्रह्म वादी ऋषि ऋषि थे उन्होंने अपनी पत्नी को विश चित्र भाव से समझने की कोशिश की कि सबकुछ स्वस्थ स्वार्थ के लिए है पुत्र के लिए पुत्र कीजिए नहीं होता पत्नी के लिए पत्नी पूरी नहीं होती सब अपने मतलब के लिए होते हैं आत्मन अस्तु का माय सर्वोपरि बहुत ही विचित्र नहीं है यह तर्क संसार में जहां कहीं प्रेम है सब मतलब के लिए सुनाएं पश्चिम के विचार को ने भी ऐसी बात कही है सुनकर हैरानी होती है दुनिया याद नहीं है नहीं है नहीं है परमार्थ नहीं है केवल स्वार्थ भीतर की जिजीविषा जीतने की इच्छा की ही अगर बड़ी बात हो तो फिर यह सारी बड़ी-बड़ी बोलियां जिनके बनाए जाते हैं शत्रु मर्द का अभिनय किया जाता है का नारा लगाया जाता है साहित्य और कला की महिमा गाई जाती है झूठ है इसके द्वारा कोई न कोई अपना स्वार्थ सिद्ध करता है लेकिन अंतर अंतर से कोई कह रहा है ऐसा सोचना गलत ढंग से सोचना है ...

भारत पर प्रकृति की कृपा

 भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है यहां सभी ऋतुएँ अपने समय पर आती है और पर्याप्त काल तक ठहरती है ऋतुएअपने अनुकूल फल फलों का सृजन करती है धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि से श्यामला हो जाती है यहां का नगद विराज हिमालय कवियों को सदस्य प्रेरणा देता आ रहा है और यहां की नदियां मोक्ष दायिनी समझी जाती रही है यहां कृत्रिम दूध और रोशनी की आवश्यकता नहीं है भारतीय मनीषा जंगल में रहना पसंद करते थे प्रकृति प्रेम के ही कारण यहां के लोग पत्तों में खाना पसंद करते हैं वृक्षों में पानी देना एवं धार्मिक कार्य समझते हैं सूर्य और चंद्र दर्शन नीति और नियमित कार्यों में शुभ माना जाता है पारिवारिक ता पर परिवार संस्कृति में विशेष बल दिया गया है भारतीय संस्कृति में शौक की अपेक्षा आनंद को अधिक महत्व दिया गया है इसलिए हमारे यहां सुकांत नाटकों का निषेध है अतिथि को भी देवता माना गया है 

अच्छा मनुष्य

ओपन या उपासना की दृष्टि से कई लोग काफी बर्थडे चड्डे होते हैं यह प्रसन्नता की बात है कि जहां दूसरे लोग भगवान को बिल्कुल ही भूल बैठे हैं वह व्यक्ति ईश्वर का स्मरण तो करता है औरों से तो अच्छा है इसी प्रकार जो बुराइयों से बचाए अनीति और व्यवस्था नहीं फैलाता संयम और मर्यादा में रहता है वह भी भला हसे बुद्धिमान कहा जाएगा क्योंकि दुर्बुद्धि को सुनाने से जो अगणित विपत्तियां उस पर टूटने वाली थी उनसे बचगया  स्वयं भी उद्विग्न नहीं हुआ और दूसरों को भी वी क्षुब्ध ने करने की भलमनसाहत बरतता  रहा। दोनों ही बातें अच्छी है ईश्वर का नाम लेना भलमनसाहत  से रहना है एक अच्छे मनुष्य के लिए योग्य कार्य है उतना तो हर समझदार आदमी को करना ही चाहिए जो उतना ही करता है उसकी उतनी तो प्रशंसा की ही जाएगी कि उनसे अनिवार्य कर्तव्यों की उपेक्षा नहीं की ओर दोस्त दुरात्माओ के होने वाले दुर्गति से अपने को बचा लिया।

उपन्यासकार सम्राट मुंशी प्रेमचंद

हिंदी साहित्य के क्षेत्र में मुंशी प्रेमचंद उपन्यास सम्राट के नाम से प्रसिद्ध है अपने जीवन के अंतिम यात्रा उन्होंने मात्र 56 वर्ष की आयु में ही पूर्ण कर ली थी यह था कि उनकी एक एक रचना 19 युगो युगो तक जीवित रखने में सक्षम है गोदाम के संदर्भ में तो यहां तक कहा गया है कि यह प्रेमचंद के सारे को जलाए जला दिया जाए और मात्र गोदाम को बचा कर रख लिया जाए वहीं उन्हें हमेशा हमेशा के लिए जीवित रखने को पर्याप्त है प्रेमचंद का जीवन बिता हो किंतु इनका ग़लत ढंग से उपार्जन करने से निर्देश दिए थे एक बार धन कमाने की इच्छा से भी गए वहां का श्रेष्ठ साहित्यकार के प्रतिकूल एवं कहानियों में किसानों की समस्याएं बेमेल विवाह  की समस्या को उजागर करके समाधान भी प्रस्तुत किया। अंग्रेजी शासन काल में उनकी रचनाओं ने स्तर का कार्य किया जिससे अंग्रेजों की नींद उड़ गई थी आदर्श एवं यथार्थ का इतना सुंदर समन्वय शायद ही कहीं मिलेगा जितना कि प्रेमचंद के उपन्यासों में मिलता है