भारत पर प्रकृति की कृपा
भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है यहां सभी ऋतुएँ अपने समय पर आती है और पर्याप्त काल तक ठहरती है ऋतुएअपने अनुकूल फल फलों का सृजन करती है धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि से श्यामला हो जाती है यहां का नगद विराज हिमालय कवियों को सदस्य प्रेरणा देता आ रहा है और यहां की नदियां मोक्ष दायिनी समझी जाती रही है यहां कृत्रिम दूध और रोशनी की आवश्यकता नहीं है भारतीय मनीषा जंगल में रहना पसंद करते थे प्रकृति प्रेम के ही कारण यहां के लोग पत्तों में खाना पसंद करते हैं वृक्षों में पानी देना एवं धार्मिक कार्य समझते हैं सूर्य और चंद्र दर्शन नीति और नियमित कार्यों में शुभ माना जाता है पारिवारिक ता पर परिवार संस्कृति में विशेष बल दिया गया है भारतीय संस्कृति में शौक की अपेक्षा आनंद को अधिक महत्व दिया गया है इसलिए हमारे यहां सुकांत नाटकों का निषेध है अतिथि को भी देवता माना गया है
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