कवि सूरदास का जीवन परिचय
अतुलनीय कवि सूरदास का जन्म साथ 1540 में हुआ था इनके जन्म स्थान के बारे में मतभेद है कुछ विद्वान आगरा मथुरा के बीच स्थित रुण कथा गांव को और कुछ दिल्ली के समीप स्थित से गांव को इन की जन्मस्थली मानते हुए सजीव वर्णन से जन मन को मुक्त करने वाले और रंग रुप वेश भूषा की अलंकारिक शैली में प्रस्तुत करने वाले महाकवि सूअर अत्यंत कुछ लोग इन्हें जन्मांध मानते हैं और कुछ बाद में अंधा होना मानते हैं और मथुरा आगरा मार्ग पर यमुना के घाट पर निवास करते थे वेदास भाव के पदों का गान किया करते थे वल्लभाचार्य जी से भेंट होने पर एवं उनके उपदेशों से प्रभावित होकर आपने श्री कृष्ण के सदस्य लीलाओं का गान प्रारंभ कर दिया सूरदास श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे इनकी लीलाओं का उन्होंने विस्तार से वर्णन किया है आपकी मान्य रचना 3 है यह श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं पर आधारित पदों का विशाल संग्रह है इसमें कृष्ण का बाल वर्णन और भ्रमरगीत संग्रहित है
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