हिंसा पर
संसार में बहुत अधिक हिंसा है शारीरिक शिक्षा है और आंतरिक हिंसा भी है दूसरे व्यक्ति को मार डालना दूसरे व्यक्ति को जानबूझकर समझकर तो बिना सोचे समझे ना शत्रुता पूर्ण और घृणा पूर्णता पूर्ण बातें करना सारे लोगों को ना लोगों से लोगों को आलो चना करना संसार में जैसे जैसे हम बड़े होते हैं हम मानव अस्तित्व के प्रति स्तर पर बहुत अति समझा देते उधमिता मेमसाहेब विचारधारा के लिए तथाकथित धार्मिक सिद्धांतों के लिए राष्ट्रीयता के लिए भूमि के छोटे से छोटे टुकड़े को देखने के लिए लोगों का नशा करने के लिए मनुष्य करेगा
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