नीव की ईट

शहादत और मन्मुख शहादत को सूरत मिले जिस बलिदान को प्रसिद्ध प्राप्त हुई ईमानदार का कंगारू है मंदिर का कलश है शहादत और मोहन मुख समाज की आधारशिला ही होती है इस साल की शहादत ने ईसाई धर्म को अमर बना दिया आपके लीजिए तो मेरी समझ से ईसाई धर्म को अमर बनाया उन लोगों ने जनों ने उस धर्म के अनुसार में अपने को नाम उस पर कर दिया उनमें से कितने जिंदा जलाए गए कितने सूली पर चढ़ाए गए कितने वन वन की खाक सालते जंगली जानवरों के शिकार हुए कितने उससे भी भयानक भूख प्यास के शिकार हुए उनके नाम शायद ही कहीं लिखे गए हो उनकी चर्चा शायद ही कई होती हो किंतु धर्म पुण्य के पुण्य प्रताप से फल-फूल रहा है वे नीव की ईट से गिरजाघर के कलश उड़ने की शहादत से चमकते हैं आज हमारा देश आजाद हुआ सिर्फ उनके बलिदानों के कारण नहीं इन्होंने इतिहास में स्थान पा लिया है हम जिसे देख नहीं सकते वैसे नहीं है यह है मुख्तार ना ढूंढने से सच्ची मिलता है हमारा काम है धर्म है ऐसे न्यू कीटों की ओर ध्यान देना सदियों के बाद में समाज की सृष्टि की और हमने पहला कदम बढ़ाया है

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