सूर्यकांत त्रिपाठी का जीवन परिचय

छायावादी कवियों में विलक्षण प्रतिभा के धनी सूर्यकांत त्रिपाठी का जन्म सन 1897 में हुआ सूर्यकांत त्रिपाठी जी ऐसे क्रांतिकारी कवि रहेंगे कविता में तत्कालीन समाज में मानव जिसमें स्वयं निराला सूर्यकांत त्रिपाठी भी है की पीड़ा परवशता एवं परतंत्रता के प्रति तीव्र आक्रोश अन्याय तथा समानता के प्रति गहरे विद्रोह के विपरीत विषम जीवन परिस्थितियों के प्रति संघर्ष करने की धुन सुनाई देती है उन्होंने कविता के साथ उपन्यास कहानी आलोचना आदि विधाओं में भी लिखा किंतु कवि थे जो जीवन के यथार्थ का चरित्र पूरी करते थे अंग्रेजी संस्कृत भाषा पर उनका असाधारण अधिकार था। वह अभिव्यक्ति के लिए नहीं काव्य रूप खोजते एवं भाषा को नहीं अभिव्यक्ति भंगी माई प्रदान करते थे तथा जीवन परिवर्तन का माध्यम काव्य फूल बना देते हिंदी में सूर्यकांत त्रिपाठी को मुक्त से प्रेरणा के रूप में जाना जाता है उनकी कविता बहुआयामी है उसमें ओजस्वी बाहों के ज्वालामुखी का विस्फोट है तो नारी के आलू की दिव्य सौंदर्य का चित्रण है साधारण जन के कष्टों का साधारण भाषा में वर्णन है ।

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