रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय

राष्ट्रीय संस्कृति काव्य धारा में दिनकर अग्रणी कवि थे मैथिलीशरण गुप्त के बाद इनका राष्ट्र कवि के रूप में जाने गए कविता में सामाजिक चेतना की मूर्खता के कारण  उन्हें युग चारण भी कहा गया बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया गांव के किसान परिवार में हुआ उनकी बियर तक की शिक्षा पटना विश्वविद्यालय में हुए उन्होंने विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दी बाद में सभी पर छोड़कर उन्होंने गृह मंत्रालय में हिंदी सलाहकार का पद संभाला दिन करने का इतिहास और सांस्कृतिक विषयों के लेखन के द्वारा हिंदी साहित्य को गौरवान्वित किया इनकी प्रमुख कृतियों में रेणुका हुंकार रसवंती कुरुक्षेत्र पूर्व से परशुराम की प्रतीक्षा और संस्कृत के चार अध्याय हैं भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया अनुरोध के संस्कृत के चार अध्याय को साहित्य अकादमी और कार्य करती और उसी को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला 25 अप्रैल पत्र पर दिवंगत हुए दिनकर ने अपने ओजस्वी वाणी से भारत की महानता को गौरव गान  किया है

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