गणपति चंद्र भंडारी का जीवन परिचय जो एक लेखक थे
राजस्थानी साहित्य अकादमी के मानद सदस्य श्री गणपति चंद्र भंडारी राजस्थान के अत्यंत लोकप्रिय कवि है रक्त दीप इनकी कविताओं का संग्रह है श्रीभंडारी अनेक सामाजिक साहित्य शिक्षण संस्थाओं का प्राण है और इनके संरक्षण एवं निर्देश में उन्होंने प्रगति के मार्ग को दुरुस्त पाया है भंडारी जी का सजा का व्यक्तित्व कभी पर्यटक निबंधकार आलोचकों तथा अध्यापक का सुंदर समन्वय थे रिंग एवं हसीन की रचनाओं के पथ्य हैं सिस्ट हंसी के फव्वारे परीक्षण के प्रति बेवकूफ कोंन? तथा भगवान से बेटा दीनबंधु में छोड़ते दृष्टिगत होते हैं इनकी लिखने में प्रसाद आत्मकथा एवं संस्था है दशा की स्वस्था विचारों की अस्पष्टता वाक्य विधान की सरलता एवं अभिव्यंजना की सुबोध दें इनकी शैली के गुण हैं सरल निष्कपट अहिरावण व्यक्तित्व श्री भंडारी जी की कविताओं एवं निबंधों में बोलता है उनके व्यक्तित्व का सबसे बड़ा गुण है आत्मीयता निज को उपस्थित करना यदि निबंध का बहुत बड़ा आकर्षण है तो भंडारी जी में वे प्रचुर मात्रा में है प्राध्यापक होने के नाते विषय के विश्लेषण की ओर इनकी रुचि अधिक है
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